इतिहास

कटिहार जिला सन 1973 ई० में पूर्णियाँ जिला से विभाजित होकर एक सम्पूर्ण जिला बना । पूर्व में कटिहार जिले में चौधरी परिवार का प्रभुत्व था, जो कोसी क्षेत्र के सबसे बड़े जमींदार थे । चौधरी परिवार के संस्थापक खान बहादुर मोहम्मद बक्श थे, जिनके पास कटिहार जिले में लगभग 15000 एकड़ जमीन तथा 8500 एकड़ जमीन पूर्णियाँ जिले में था।

भारतीय इतिहास में कटिहार जिले का एक ऐतिहासिक स्थान रहा है, ऐसा कहा जाता है कि हिन्दू भगवान श्री कृष्ण यहाँ आये थे और उन्होंने मनिहारी (कटिहार जिले का एक धार्मिक स्थल ) में मणि को खो दिया था। कटिहार, पूर्णियाँ जिले एक हिस्सा हुआ करता था जो बाद में 1813 ई० के आस पास मालदा जिले के साथ गठित किया गया था । मुग़ल शासन के तहत सरकार ताजपुर,  महानंदा के पूर्व एवं नदी के पश्चिम में सरकार पूर्णियाँ का गठन किया गया था । 12 वीं शताब्दी के करीब बख्तियार खिलजी द्वारा बिहार एवं बिहार की  राजधानी पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् बिहार प्रान्त मुस्लिम शासन के अंतर्गत आया । उसके उत्तराधिकारी गयासुद्दीन ईवाज ने क्षेत्र विस्तार करते हुए सम्पूर्ण बिहार को शामिल किया । 13 वीं शताब्दी के शुरुआत में कटिहार  मुसमानों के शासन में आया ।

कटिहार जिला सन 1770 ई० में, जब मोह्हमद अली खान पूर्णियाँ के गवर्नर थे, तब उन्होंने इस जिले को अंग्रेजों के हाथों में दे दिया । डुक्रेऐल, जो जिले के कलेक्टर के प्रथम अंग्रेज पर्यवेक्षक थे, ने उन्हें बदल दिया । सन 1872 ई० में जिला को कलकत्ता राजस्व बोर्ड के अधीन बिहार और बनारस राजस्व बोर्ड में स्थानांतरित  किया गया । अंग्रेजों के शासन काल के शरुआती वर्षों में काफी हद तक कानून वयवस्था स्थापित करने और राजस्व, प्रशासन के अधीन करने के निर्देश दिए गए थे । महाजनपद के शासन काल में अंग और मगध के राजाओं ने भी कटिहार पर शासन किया था । मोरंग के राजा बिराट ने भी इस जगह का दौरा किया था। उत्तर भारत में मुस्लिम शासन के आगमन के साथ, इख्तियार-उद-दिन बख्तियार खिलजी ने इस क्षेत्र को आबाद किया और बाद में यह क्षेत्र अप्रत्यक्ष रूप से मुग़ल शासन के अधीन रहा। अंग्रेजों के शासन में कटिहार जिला जमींदारों के शासन में आया। नवाब, जो भारतीय थे और अंग्रेजों की मदद कर रहे थे । बंगाल के विभाजन से पहले कटिहार बंगाल का अंग हुआ करता था। बाद में बंगाल को बिहार, बंगाल और ओड़िसा में बांटा गया। आज का कटिहार जिला बिहार प्रदेश का अंग है । भारत भर में जब ब्रिटिश शासन को चुनौती दी गयी तब कटिहार आन्दोलन में सबसे आगे थे । भारत की  स्वतंत्रता के साथ साथ कटिहार के लोगों ने भी सभी भारतीयों के साथ आजादी की सांस ली। तब कटिहार पूर्णियाँ जिला का एक अंग था । लेकिन, 2 अक्टूबर 1973 को कटिहार जिला एक स्वतंत्र जिला का दर्जा हासिल कर लिया । पूर्णियाँ के मूल जिले के साथ इसकी समृद्ध विरासत और निकट संबंध है । जिले को इसके  प्रमुख शहर के नाम से जाना जाता है, जिसका नाम शायद दिधी- कटिहार नामक एक पूर्वोत्तर के छोटे गाँव से मिला, जहाँ खुदाई में सैनिकों के लिए एक बड़ा टैंक (दिघी ) है , जब नवाब के सैनिक पूर्णियाँ, मुर्शिदाबाद के नवाब के सैनिकों के साथ लड़ रहे थे ।